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Monday, October 13, 2008
धर्मनिरपेक्षता याने हिन्दू विरोध???????
आज सारा देश जिस विडंवना से गुजर रहा है,वह सोचने लायक है। जानकारी के लिये बताना चाहता हूँ,मैं धर्म-निरपेक्षवादी बिल्कुल नहीं हूँ बल्कि धर्म-सापेक्षवादी हूँ। आज धर्म-निरपेक्षता का मतलव हिन्दुओं का विरोध है। जो राजनैतिक स्तर पर ही नहीं हम से भी जुडा हुआ है। उनके लिये खास कर कहना चाहता हूँ जो राजनीति की बात को राजनीति मानते हैं। जब देश में चल रहे हालात के लिये राजनीति ही ज़िम्मेदार है तव उसकी चर्चा क्यों ना की जाये मेरे प्रिय साथियों के लिये भी कहना चाहता हूँ जो हिन्दुओं की आँख बंद करके बुराई करते हैं पुरानी वो बातें करते हैं जो उस दौर में सब धर्मों में थीं। अगर इतना ही एतराज़ है अपने धर्म से तो छोड क्यों नहीं देते या फिर आप अपने को अलग बता कर क्या दिखाना चाहते हैं? ऐंसे हिन्दुओं के लिये सिर्फ यही शब्द हैं कि या तो वो आलोचना छोंडें या फिर आगे आकर जहाँ जो सुधार लगता है वो करें किसने रोका है। हिन्दू धर्म की खामियां दूर करने आयें कौन मना करता है। हिन्दुं के पक्ष का मतलव मुस्लिमों का विरोध नहीं है भाईयों खुद में कोई गलती है तो अपनेआप को मार डालना या छोड देना ठीक बात है ना ये संभव है। व्यवस्था बदलने के लिये व्यवस्था में रहना चाहिये ना कि व्यवस्था से हट कर इसे बदलने का निर्थक प्रयास करने चाहिये।
Sunday, October 12, 2008
धर्म क्या है?
पहले धर्म को समझें।
दोस्तों पिछले कुछ दिनों से केव्स पर गरमा गरम पढने को मिल रहा था हालांकि बहस अपनी सार्थकता खो चुकी थी कमेंन्ट्स कर नहीं पा रहा था, तो मन किया कुछ मैं भी लिखूं और आज चला आया कुछ लिखने के लिये। सचमुच धर्म से जुडा मुद्दा वेहद संजीदा क़िस्म का होता है जिस पर हम जैसे कम बुद्धियों को तो क़तई नही बोलना चाहिये क्योंकि कोई भी धर्म महज़ अपने आराध्य को पूजने, आरती करने तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि यह एक वृहद विज्ञान होता है। इसे धर्म इसलिये कहा जाता है ताकि अनुयायी निर्दिष्ट पूजन विधान को करें और स्वस्थ रह सकें। इंसान के भीतर विद्यमान सभी दस रसों में से भय का हमारे ऋषियों(वैज्ञानिकों) ने इस्तेमाल करते हुए इसे सर्वोच्च सत्ता के प्रति भय और उसे अपना माई-बाप मानने की सीख दी, क्योंकि विज्ञान हर आदमी नहीं समझता। मुझे शायद धर्म की इससे ज़्यादा सरल परिभाषा कुछ और नहीं लगी मैं इस मंच के माध्यम से सबसे पहले धर्म क्या है ये समझने की कोशिश करना चाहता हूँ। आप सभी का सादर कमेंट्स आमंत्रित हैं कृपया दें और कारवां ये वार्ता आगे बढायें। धन्यवाद।।।।।।।।।।
दोस्तों पिछले कुछ दिनों से केव्स पर गरमा गरम पढने को मिल रहा था हालांकि बहस अपनी सार्थकता खो चुकी थी कमेंन्ट्स कर नहीं पा रहा था, तो मन किया कुछ मैं भी लिखूं और आज चला आया कुछ लिखने के लिये। सचमुच धर्म से जुडा मुद्दा वेहद संजीदा क़िस्म का होता है जिस पर हम जैसे कम बुद्धियों को तो क़तई नही बोलना चाहिये क्योंकि कोई भी धर्म महज़ अपने आराध्य को पूजने, आरती करने तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि यह एक वृहद विज्ञान होता है। इसे धर्म इसलिये कहा जाता है ताकि अनुयायी निर्दिष्ट पूजन विधान को करें और स्वस्थ रह सकें। इंसान के भीतर विद्यमान सभी दस रसों में से भय का हमारे ऋषियों(वैज्ञानिकों) ने इस्तेमाल करते हुए इसे सर्वोच्च सत्ता के प्रति भय और उसे अपना माई-बाप मानने की सीख दी, क्योंकि विज्ञान हर आदमी नहीं समझता। मुझे शायद धर्म की इससे ज़्यादा सरल परिभाषा कुछ और नहीं लगी मैं इस मंच के माध्यम से सबसे पहले धर्म क्या है ये समझने की कोशिश करना चाहता हूँ। आप सभी का सादर कमेंट्स आमंत्रित हैं कृपया दें और कारवां ये वार्ता आगे बढायें। धन्यवाद।।।।।।।।।।
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